मंगलाचरण

0 टिप्पणीहरू 590 आगन्तुकहरू

सर्ववेदान्तसिद्धान्तगोचरं तमगोचरम् ।
गोविन्दं परमानन्दं सद्गुरुं प्रणतोऽस्म्यहम् ।। १ ।।

जो इन्द्रियहरूद्वारा अज्ञेय (अदृश्य) भए तापनि सर्ववेदान्तका सिद्धान्तहरूद्वारा ज्ञेय (जान्न, बुझ्न) सकिन्छ, त्यस्ता परमान्द स्वरूप सद्गुरु श्रीगोविन्दलाई नै प्रणाम गर्दछु । ।।१।।

यो ग्रन्थको प्रथम श्लोकमा आदि शंकराचार्य आफ्नो श्रद्वेय गुरु श्री गोविन्द पादलाई स्मरण गर्दै वन्दना गर्नुहुन्छ । यो प्राचीन गुरु–शिष्य परम्परामा गुरुप्रति दर्शाइने श्रद्धाको अनुपम उदाहरण हो ।

“गुरु श्रीगोविन्दपाद, जो स्वयं देहधारी पुरुष हुनुहुन्थ्यो, लाई परमात्मा स्वरूप अनि अज्ञेय (जान्न, बुझ्न नसकिने) भएर पनि वेदान्तका सिद्धान्तद्वारा ज्ञेय हुनुहुन्छ”, भनी सम्बोधन गरी वेदान्त दर्शनको मूलमर्मलाई प्रथम–श्लोकमा उद्वासित गर्नुभएको छ ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


CAPTCHA Image
Reload Image

पुराना लेखहरु

लेखहरु प्रकाशित मिति आगन्तुकहरू टिप्पणीहरू
किन महासतिपवान मात्र सत्यमोक्ष साधना हो ? 08 poush 2079 572 0
मुक्तिको दुर्लभता 1/15/2023 492 0
मनुष्य जन्मको दुर्लभता 1/15/2023 734 0
विचारको महङ्खव 1/15/2023 475 0
शिष्य लक्षण 1/15/2023 556 0
साधन–चतुष्टय 1/15/2023 1453 0
वैराग्य र मुमुक्षताको महङ्खव 1/15/2023 521 0
सद्गुरु लक्षण 553 0
शिष्य प्रार्थना 1/15/2023 617 0
गुरु कर्तव्य 1/15/2023 655 0
1/15/2023 465 0
शिष्य प्रशंसा 1/15/2023 512 0
मोक्षमा स्वप्रयत्नको प्रधानता 1/15/2023 486 0
शास्त्र अध्ययनको मिथ्यात्व 1'/15/2023 568 0
अपरोक्षानुभवको आवश्यकता 488 0
स्थूल शरीरको व्याख्या 1/15/2023 831 0
विषयविन्दा 1/15/2023 531 0
देहाशक्तिको निन्दा 1/15/2023 515 0
स्थूल शरीर निन्दा 1/15/2023 664 0
दश इन्द्रियहरू 1/15/2023 890 0
अन्तःकरण चतुष्ट्य 1/15/2023 641 0
पञ्चप्राण 1/15/2023 642 0
सूक्ष्म शरीर वर्णन 1/15/2023 729 0
प्राणको धर्म 1/15/2023 434 0
अहंकार 1/15/2023 477 0
आत्माको परम प्रेमास्पदता 1/15/2023 396 0
माया वर्णन 1/15/2023 1086 0
रजोगुण 1/15/2023 496 0
तमोगुण 1/15/2023 428 0
सङ्खवगुण 1/15/2023 469 0
कारण शरीर 1/15/2023 496 0
आत्मा–निरूपण 1/15/2023 488 0
अध्यास 1/15/2023 648 0
आवरण र विक्षेपशक्ति 1/15/2023 658 0
बन्ध निरूपण 1/15/2023 426 0
अन्नमय कोश 1/15/2023 472 0
प्राणमय कोश 1/15/2023 474 0
मनोमय कोश 1/15/2023 443 0
विज्ञानमय कोश 1/15/2023 486 0
मुक्ति कसरी प्राप्त हुन्छ ? 1/15/2023 577 0
आनन्दमय कोश 1/15/2023 398 0
आत्मस्वरूप विषयक प्रश्न 1/15/2023 401 0
आत्मस्वरूप निरूपण 1/15/2023 459 0
ब्रह्मा र जगत्को एकता 1/15/2023 416 0
जगत्को मिथ्यात्व 1/15/2023 485 0
ब्रह्म निरूपण 1/15/2023 735 0
महावाक्य – विचार 1/15/2023 566 0
ब्रह्मा–भावना 1/15/2023 570 0
वासना त्याग 1/15/2023 573 0
अध्यास निराकरण 1/15/2023 562 0
अहंपदार्थ निरूपण 1/15/2023 508 0
अहंकार – मुख्यवाधा 1/15/2023 384 0
क्रिया, चिन्ता, र वासना त्याग 1/15/2023 430 0
प्रमाद – निन्दा 1/15/2023 517 0
अविद्याको स्थिति 1/15/2023 492 0
आत्म निष्ठाबाट सर्वात्मभाव 1/15/2023 489 0
समाधिद्वारा विकल्पको नाश 1/15/2023 497 0
ध्यानद्वारा परमात्मभावको प्राप्ती 1/15/2023 574 0
निर्विकल्प समाधिको महङ्खव 1/15/2023 472 0
समाधि – प्राप्तिको उपाय 1/15/2023 510 0
वैराग्य र मुमुक्षुताको आवश्यकता 1/15/2023 465 0
ध्यान विधि 1/15/2023 478 0
आत्म दृष्टि 1/15/2023 493 0
ब्रह्ममा भेदको अभाव 1/15/2023 498 0
आत्म चिन्तनको उपदेश 1/15/2023 410 0
शरीर उपेक्षा 1/15/2023 403 0
आत्मज्ञानको फल 1/15/2023 510 0
जीवनमुक्तको लक्षण 1/15/2023 493 0
प्रारब्ध कर्म विचार 512 0
प्रारब्ध निराकरण 1/15/2023 475 0
नानात्व – निषेध 1/15/2023 533 0
वेदान्त – सिद्धान्तको सार 1/15/2023 556 0
बोधोपलब्धी 1/15/2023 496 0
शिष्यको अनुभव 1/15/2023 547 0
सद्गुरूप्रति कृतज्ञता 1/15/2023 698 0
गुरुको अन्तिम उपदेश 1/15/2023 863 0
आत्माको अविनाशिता 1/15/2023 905 0
परमार्थता 1/15/2023 1386 0
शिष्य बिदाइ 1/15/2023 1166 0
अनुवन्ध – चतृष्टय 1/15/2023 35264 0