दश इन्द्रियहरू

0 टिप्पणीहरू 983 आगन्तुकहरू

बुद्धीन्द्रियाणि श्रवणं त्वगक्षि घ्राणं च जिह्वा विषयावबोधनात् ।
वाक्पाणिपादाः गुदमप्युपस्थः कर्मेन्द्रियाणि प्रवणेन कर्मसु ।।९४।।

कान, छाला, आँखा, नाक र जिब्रोबाट विषयको ज्ञान हुने हुँदा (यिनीहरूलाई) ज्ञानेन्द्रिय भनिन्छ । त्यस्तै वाणी, हात, खुट्टा, गुहद्वार र जनेन्द्रिय कर्ममा व्यग्र (लिप्त) हुने हुँदा कर्मेन्द्रिय भनिन्छ । ।।९४।।

स्थूल शरीरमा स्थित ज्ञानेन्द्रिय र कर्मेन्द्रीयबाट जीवले भोगकर्म गर्दछ । यिनीहरूको व्याख्या गर्दै यो श्लोकमा भनिएको छ – देहमा स्थित पाँच इन्द्रियबाट पाँच विषय (शब्द, स्पर्श, दृश्य, गन्ध, रस) को ज्ञान हुन्छ; यिनीहरूलाई ज्ञानेन्द्रिय भनिन्छ । त्यस्तै शरीरका अङ्ग वाणी (मुख), पाणी (हात), खुट्टा, गुहद्वार र जनेन्द्रिय आ—आफ्ना धर्मअनुसारको कर्म गर्दछन् । यिनीहरूलाई कर्मेन्द्रीय भनिन्छ । ज्ञानेन्द्रिय र कर्मेन्द्रियको क्रियाहरूको सम्बन्ध मन अनि वासना हुँदै जीव–बबन्धनसम्म विस्तार भएकाले मोक्षका साधकहरूले देह, ज्ञानेन्द्रिय, कर्मेन्द्रिय, मन, वासना अनि बन्धनको अन्योन्याश्रित सम्बन्धलाई गहिराइमा बुझ्न अत्यन्त आवश्यक छ ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


CAPTCHA Image
Reload Image

पुराना लेखहरु

लेखहरु प्रकाशित मिति आगन्तुकहरू टिप्पणीहरू
किन महासतिपवान मात्र सत्यमोक्ष साधना हो ? 08 poush 2079 640 0
मंगलाचरण 1/15/2023 647 0
मुक्तिको दुर्लभता 1/15/2023 540 0
मनुष्य जन्मको दुर्लभता 1/15/2023 794 0
विचारको महङ्खव 1/15/2023 519 0
शिष्य लक्षण 1/15/2023 612 0
साधन–चतुष्टय 1/15/2023 1587 0
वैराग्य र मुमुक्षताको महङ्खव 1/15/2023 604 0
सद्गुरु लक्षण 631 0
शिष्य प्रार्थना 1/15/2023 691 0
गुरु कर्तव्य 1/15/2023 723 0
1/15/2023 511 0
शिष्य प्रशंसा 1/15/2023 572 0
मोक्षमा स्वप्रयत्नको प्रधानता 1/15/2023 560 0
शास्त्र अध्ययनको मिथ्यात्व 1'/15/2023 626 0
अपरोक्षानुभवको आवश्यकता 546 0
स्थूल शरीरको व्याख्या 1/15/2023 919 0
विषयविन्दा 1/15/2023 610 0
देहाशक्तिको निन्दा 1/15/2023 571 0
स्थूल शरीर निन्दा 1/15/2023 726 0
अन्तःकरण चतुष्ट्य 1/15/2023 759 0
पञ्चप्राण 1/15/2023 734 0
सूक्ष्म शरीर वर्णन 1/15/2023 793 0
प्राणको धर्म 1/15/2023 484 0
अहंकार 1/15/2023 557 0
आत्माको परम प्रेमास्पदता 1/15/2023 454 0
माया वर्णन 1/15/2023 1188 0
रजोगुण 1/15/2023 578 0
तमोगुण 1/15/2023 498 0
सङ्खवगुण 1/15/2023 521 0
कारण शरीर 1/15/2023 588 0
आत्मा–निरूपण 1/15/2023 556 0
अध्यास 1/15/2023 724 0
आवरण र विक्षेपशक्ति 1/15/2023 724 0
बन्ध निरूपण 1/15/2023 498 0
अन्नमय कोश 1/15/2023 538 0
प्राणमय कोश 1/15/2023 552 0
मनोमय कोश 1/15/2023 513 0
विज्ञानमय कोश 1/15/2023 592 0
मुक्ति कसरी प्राप्त हुन्छ ? 1/15/2023 627 0
आनन्दमय कोश 1/15/2023 466 0
आत्मस्वरूप विषयक प्रश्न 1/15/2023 465 0
आत्मस्वरूप निरूपण 1/15/2023 533 0
ब्रह्मा र जगत्को एकता 1/15/2023 461 0
जगत्को मिथ्यात्व 1/15/2023 555 0
ब्रह्म निरूपण 1/15/2023 793 0
महावाक्य – विचार 1/15/2023 642 0
ब्रह्मा–भावना 1/15/2023 638 0
वासना त्याग 1/15/2023 649 0
अध्यास निराकरण 1/15/2023 640 0
अहंपदार्थ निरूपण 1/15/2023 558 0
अहंकार – मुख्यवाधा 1/15/2023 466 0
क्रिया, चिन्ता, र वासना त्याग 1/15/2023 482 0
प्रमाद – निन्दा 1/15/2023 583 0
अविद्याको स्थिति 1/15/2023 560 0
आत्म निष्ठाबाट सर्वात्मभाव 1/15/2023 561 0
समाधिद्वारा विकल्पको नाश 1/15/2023 587 0
ध्यानद्वारा परमात्मभावको प्राप्ती 1/15/2023 652 0
निर्विकल्प समाधिको महङ्खव 1/15/2023 536 0
समाधि – प्राप्तिको उपाय 1/15/2023 572 0
वैराग्य र मुमुक्षुताको आवश्यकता 1/15/2023 539 0
ध्यान विधि 1/15/2023 534 0
आत्म दृष्टि 1/15/2023 575 0
ब्रह्ममा भेदको अभाव 1/15/2023 574 0
आत्म चिन्तनको उपदेश 1/15/2023 492 0
शरीर उपेक्षा 1/15/2023 479 0
आत्मज्ञानको फल 1/15/2023 576 0
जीवनमुक्तको लक्षण 1/15/2023 565 0
प्रारब्ध कर्म विचार 596 0
प्रारब्ध निराकरण 1/15/2023 561 0
नानात्व – निषेध 1/15/2023 621 0
वेदान्त – सिद्धान्तको सार 1/15/2023 648 0
बोधोपलब्धी 1/15/2023 552 0
शिष्यको अनुभव 1/15/2023 613 0
सद्गुरूप्रति कृतज्ञता 1/15/2023 750 0
गुरुको अन्तिम उपदेश 1/15/2023 937 0
आत्माको अविनाशिता 1/15/2023 1001 0
परमार्थता 1/15/2023 1480 0
शिष्य बिदाइ 1/15/2023 1220 0
अनुवन्ध – चतृष्टय 1/15/2023 35538 0